सीमांत क्षेत्र की महिलाओं ने रचा नया कीर्तिमान, आईटीबीपी को ₹2.25 लाख से अधिक की पोल्ट्री एवं बकरी आपूर्ति
पिथौरागढ़ : ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के अंतर्गत महिला स्वयं सहायता समूहों और सीएलएफ को संस्थागत बाजारों से जोड़ने के प्रयास लगातार सफलता की नई मिसाल कायम कर रहे हैं। इसी क्रम में आज दिनांक 20 जून 2026 को विकासखंड मूनाकोट की महिला उद्यमियों एवं पशुपालकों ने 14वीं वाहिनी मुख्यालय, आईटीबीपी जाजरदेवल, पिथौरागढ़ को जीवित मुर्गियों एवं बकरा/बकरी की आपूर्ति कर ₹2.25 लाख से अधिक का व्यवसाय अर्जित किया।

विकासखंड मूनाकोट के देवतपुर स्थित महिला उत्थान स्वयं सहायता समूह की सदस्य श्रीमती मंजू देवी ने जय माता दी सीएलएफ, लेलू के माध्यम से 520 किलोग्राम जीवित मुर्गियों की आपूर्ति की। ₹125 प्रति किलोग्राम की दर से हुई इस आपूर्ति से ₹65,000 का व्यवसाय प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि दर्शाती है कि ग्रामीण महिला उद्यमी अब स्थानीय बाजारों तक सीमित न रहकर संस्थागत बाजारों में भी अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं।

इसी दिन मां भगवती सीएलएफ एवं संघर्ष सीएलएफ द्वारा संयुक्त रूप से 495 किलोग्राम जीवित बकरा/बकरी की आपूर्ति आईटीबीपी को की गई। ₹324 प्रति किलोग्राम की दर से हुई इस आपूर्ति से लगभग ₹1.60 लाख का व्यवसाय प्राप्त हुआ। इस आपूर्ति में चार अलग-अलग स्वयं सहायता समूहों की 7 महिला पशुपालकों ने भागीदारी निभाई, जिससे उन्हें अपने पशुधन का उचित एवं लाभकारी मूल्य प्राप्त हुआ।
एक ही दिन में कुल 1,015 किलोग्राम जीवित मुर्गियों एवं बकरा/बकरी की आपूर्ति कर महिला समूहों ने यह सिद्ध कर दिया है कि संगठित प्रयास, संस्थागत बाजारों तक पहुंच और परियोजना का सहयोग ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है। यह पहल न केवल महिलाओं की आय में वृद्धि कर रही है, बल्कि सीमांत क्षेत्रों में स्वरोजगार, पशुपालन आधारित उद्यमिता और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही है।

इस अवसर पर ग्रामोत्थान परियोजना से आजीविका समन्वयक नीरज भंडारी एवं किरण ग्वाल उपस्थित रहे। साथ ही सीएलएफ स्टाफ से सौरव, दीपक, प्रिया, खीमराज, अनिल सिंह एवं गरिमा तथा मां भगवती सीएलएफ एवं संघर्ष सीएलएफ की अध्यक्षगण भी उपस्थित रहीं।
ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना द्वारा पशुपालन विभाग के सहयोग से महिला समूहों को संस्थागत बाजारों से जोड़ने की यह पहल सीमांत क्षेत्रों की महिलाओं के लिए आय वृद्धि का सशक्त माध्यम बन रही है। आईटीबीपी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़ाव ने महिलाओं को उत्पादों के लिए सुनिश्चित बाजार उपलब्ध कराया है, जिससे वे आत्मनिर्भरता की ओर मजबूती से अग्रसर हो रही हैं।

