उत्तराखंड

वैदिक मानस योग नई पीढ़ी के मानसिक, बौद्धिक और चारित्रिक विकास का सशक्त माध्यमः राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह

विद्यार्थियों के प्रदर्शन की राज्यपाल ने सराहना करते हुए कहा कि यह वैदिक मानस योग की प्रभावशीलता का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने कहा कि बच्चों की प्रतिभा, आत्मविश्वास और आंतरिक चेतना में आया सकारात्मक परिवर्तन अत्यंत प्रेरणादायक है तथा यह पहल नई पीढ़ी के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

राज्यपाल ने कहा कि वैदिक मानस योग का सबसे बड़ा उद्देश्य व्यक्ति को स्वयं से परिचित कराना है। उन्होंने कहा कि बाहरी दुनिया को देखना सरल है, लेकिन अपने भीतर झांकना, अपनी आंतरिक शक्ति, आत्मविश्वास और आत्म-मूल्य को पहचानना ही वास्तविक साधना है। जब व्यक्ति अपने मन, बुद्धि और चेतना को जागृत कर लेता है, तभी वह जीवन की चुनौतियों का सामना अधिक प्रभावी ढंग से कर सकता है। राज्यपाल ने कहा कि इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों की प्रतिभा और एकाग्रता का जो प्रदर्शन देखने को मिला, वह अत्यंत प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपनी आंतरिक चेतना और क्षमता को जागृत कर लेता है तो उसके भीतर आत्मविश्वास का नया संचार होता है और वह कठिन से कठिन चुनौतियों का भी सफलतापूर्वक सामना कर सकता है।

उन्होंने पतंजलि योगपीठ के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल बच्चों और युवाओं के  आत्मविश्वास और आंतरिक चेतना को विकसित करने का प्रभावी माध्यम बन रही है। राज्यपाल ने कहा कि वैदिक मानस योग की शुरुआत उत्तराखण्ड से व्यापक जनआंदोलन के रूप में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि योग, अध्यात्म और सनातन ज्ञान की इस पावन भूमि से प्रारंभ होकर यह अभियान प्रदेश के प्रत्येक जनपद और गांव तक पहुंचे तथा आगे चलकर पूरे देश और विश्व में भारतीय ज्ञान परंपरा का संदेश पहुंचाना चाहिए। राज्यपाल ने पतंजलि योगपीठ के सीईओ आचार्य बालकृष्ण एवं पूरी टीम को इस अभिनव और दूरदर्शी पहल के लिए बधाई देते हुए इसे नई पीढ़ी के सर्वांगीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

इस अवसर पर प्रथम महिला गुरमीत कौर, पतंजलि योगपीठ के सीईओ आचार्य बालकृष्ण, मास्टर ट्रेनर अरविन्द राणा, लोक भवन में अधिकारी, कर्मचारी और उनके परिजन उपस्थित रहे।

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