उत्तराखंड में राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण की शुरुआत, 13 जिलों में होगा प्रवासन, ऋण और निवेश का व्यापक अध्ययन
देहरादून : उत्तराखंड में सामाजिक एवं आर्थिक विकास से जुड़ी नीतियों को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण (एनएसएस) की 81वीं आवृत्ति शुरू हो गई है। इसके लिए दून विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। सर्वेक्षण जुलाई 2026 से 30 जून 2027 तक राज्य के सभी 13 जिलों में संचालित होगा।
अर्थ एवं संख्या निदेशालय (नियोजन विभाग) की ओर से आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन निदेशक सुशील कुमार ने किया। उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण के माध्यम से प्रवासन, ऋण, निवेश और सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों से जुड़े विस्तृत आंकड़े जुटाए जाएंगे, जो राज्य और केंद्र सरकार की विकास योजनाओं एवं नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण आधार बनेंगे।
उप निदेशक डॉ. इला पंत बिष्ट ने बताया कि सर्वेक्षण के दौरान परिवारों से प्रवासन की स्थिति, पिछले 365 दिनों में प्राप्त रेमिटेंस, रोजगार, आर्थिक गतिविधियां, कृषि परिवारों की आय, उत्पादन परिसंपत्तियां, कृषि पद्धतियां, आधुनिक तकनीकों के उपयोग, गैर-वित्तीय परिसंपत्तियां तथा ऋणग्रस्तता संबंधी जानकारी एकत्र की जाएगी।
कार्यशाला में भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के विशेषज्ञ सर्वेक्षण की कार्यप्रणाली, डिजिटल डेटा संकलन और गुणवत्ता नियंत्रण पर अधिकारियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। इसमें प्रदेश के सभी जिलों, मंडलों और विकासखंडों के अधिकारी शामिल हुए।
अधिकारियों के अनुसार यह सर्वेक्षण राज्य में प्रवासन, रोजगार, कृषि अर्थव्यवस्था, आय, परिसंपत्तियों और ऋण की वास्तविक स्थिति का व्यापक चित्र प्रस्तुत करेगा, जिससे भविष्य की योजनाओं को अधिक सटीक और प्रभावी ढंग से तैयार किया जा सकेगा।

