सेना और यूएसडीएमए का समन्वय होगा मजबूत, राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर बनी रणनीति
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि उत्तराखंड जैसे आपदा संभावित राज्य में भारतीय सेना हमेशा भरोसेमंद सहयोगी रही है। उन्होंने केदारघाटी आपदा (2024) और धराली सहित अन्य प्रभावित क्षेत्रों (2025) में सेना और वायु सेना द्वारा राहत एवं बचाव कार्यों में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार सेना के साथ बेहतर समन्वय के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उत्तराखंड सब एरिया के डिप्टी जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) ब्रिगेडियर आर.एस. थापा ने कहा कि आपदा के समय सेना का सर्वोच्च उद्देश्य मानव जीवन की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि सेना की प्राथमिकता गोल्डन ऑवर के दौरान ही राहत एवं बचाव अभियान शुरू करना है, ताकि अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सके।
बैठक में सचिव विनोद कुमार सुमन ने सेना से राहत एवं बचाव में उपयोग होने वाले उपकरणों और संसाधनों का विवरण इंडिया डिजास्टर रिसोर्स नेटवर्क (आईडीआरएन) पोर्टल पर अपलोड करने का अनुरोध किया, ताकि जरूरत पड़ने पर विभिन्न एजेंसियां उनका प्रभावी उपयोग कर सकें।इसके अलावा विभिन्न जिलों की क्विक रिस्पॉन्स टीम (क्यूआरटी) में सेना की सहभागिता बढ़ाने तथा पूर्व सैनिकों के अनुभव और विशेषज्ञता को राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था से जोड़ने पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में यूएसडीएमए के एसीईओ (प्रशासन) प्रकाश चंद्र, एसीईओ (क्रियान्वयन) डीआईजी राजकुमार नेगी, जेसीईओ दिनेश कुमार पुनेठा सहित प्राधिकरण के विशेषज्ञ और सेना के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

