उत्तराखंड

कांवड़ यात्रा-2026 बनी पर्यावरण संरक्षण का मंच: मुजफ्फरनगर से शुरू हुई ‘बॉटल की रीसायकल यात्रा’, अब प्लास्टिक नहीं बनेगा कचरा 

मुज़फ्फरनगर : एसोसिएशन ऑफ पीईटी रीसाइक्लर्स भारत (एपीआर भारत) ने कांवड़ यात्रा के दौरान प्लास्टिक कचरे के जिम्मेदार निपटान और पीईटी बोतलों की रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘बॉटल की रीसायकल यात्रा’ अभियान शुरू किया है। 15 दिनों के इस अभियान के तहत विशेष जागरूकता वैन मुज़फ्फरनगर और मेरठ में कांवड़ यात्रा मार्ग के चार प्रमुख स्थानों पर संचालित होगी।

अभियान का लक्ष्य 35 हजार से अधिक पीईटी बोतलों को एकत्र कर उन्हें औपचारिक रीसाइक्लिंग प्रणाली से जोड़ना है। वैन के माध्यम से श्रद्धालुओं और आम नागरिकों को पीईटी बोतलों के पृथक संग्रह, वैज्ञानिक निपटान और रीसाइक्लिंग के महत्व की जानकारी दी जाएगी।

एपीआर भारत के डायरेक्टर जनरल गौतम जैन ने कहा कि उपयोग के बाद फेंकी गई पीईटी बोतल कचरा नहीं, बल्कि नई बोतल बनने की शुरुआत है। कांवड़ यात्रा जैसे विशाल जनसमागम के माध्यम से लोगों तक जिम्मेदार उपयोग और जिम्मेदार निपटान का संदेश पहुंचाया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक बोतलें सर्कुलर अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन सकें।

उन्होंने कहा कि सरकार ने वर्ष 2026-27 तक प्लास्टिक पैकेजिंग में 40 प्रतिशत रीसाइक्ल्ड सामग्री के उपयोग का लक्ष्य निर्धारित किया है, लेकिन इसे सफल बनाने के लिए जमीनी स्तर पर जनभागीदारी और जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है।

एपीआर भारत के अनुसार वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अनिश्चितता और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए रीसाइक्ल्ड पीईटी (आर-पीईटी) का उपयोग संसाधन सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर विनिर्माण व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। संगठन भविष्य में इस अभियान का विस्तार पश्चिमी, पूर्वी और दक्षिण भारत के अन्य क्षेत्रों में भी करेगा।

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